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कलेक्टर के सख्त निर्देश… फिर भी सिंध घाट पर किसका संरक्षण?

खनिज विभाग की कार्रवाई पर सवाल: सिंध घाट तक क्यों नहीं पहुँची टीम?”

कोलारस
अर्पित वर्मा के निर्देशन में शिवपुरी जिले में अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोलारस अनुविभाग के लुकवासा क्षेत्र में गिट्टी का अवैध परिवहन कर रहे 03 डम्पर/हाईवा जब्त किए। कार्रवाई खनिज निरीक्षक रिऋभ सिंह दीक्षित के नेतृत्व में की गई। जब्त वाहन फिलहाल लुकवासा चौकी की अभिरक्षा में रखे गए हैं।
इसके अलावा ग्राम कुल्हाड़ी में करीब 10 घन मीटर अवैध रेत का भंडारण पकड़ा गया, जहाँ से एक ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त की गई। वहीं ग्राम करई डांडा में लगभग 20 घन मीटर एम-सैंड और 05 घन मीटर रेत का अवैध भंडारण सामने आने पर एक और ट्रैक्टर-ट्रॉली प्रशासन ने कब्जे में ली, जिसे थाना सुरवाया की निगरानी में सौंप दिया गया है। विभाग ने सभी मामलों में वैधानिक कार्रवाई और अर्थदंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कलेक्टर अर्पित वर्मा ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लेकिन इन कार्रवाइयों के बीच अब कई बड़े सवाल भी खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों में चर्चा है कि आखिर सिंध नदी के घाटों तक खनिज विभाग की टीम क्यों नहीं पहुँची? क्या किसी प्रभावशाली फोन कॉल के बाद कार्रवाई का रुख बदल गया?
चर्चा यह भी है कि जिन घाटों पर रात-दिन अवैध रेत उत्खनन की शिकायतें लंबे समय से उठती रही हैं, वहाँ कार्रवाई करने के बजाय विभाग की पूरी मुहिम आखिर सिर्फ एक ट्रैक्टर-ट्रॉली तक ही क्यों सीमित रह गई?
क्या बड़े रेत माफियाओं को पहले ही सूचना दे दी गई थी?
क्या कार्रवाई सिर्फ “औपचारिकता” निभाने के लिए की गई?
और सबसे बड़ा सवाल — आखिर किसके संरक्षण में सिंध नदी के घाटों पर अवैध कारोबार जारी है?
जिले में यह चर्चा तेज है कि यदि प्रशासन वास्तव में सख्ती दिखाना चाहता है तो कार्रवाई केवल छोटे वाहनों तक सीमित न रहकर उन बड़े नेटवर्क तक पहुँचना चाहिए, जिनके इशारे पर रातों-रात रेत और गिट्टी का काला कारोबार फल-फूल रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन सिंध घाटों पर भी बड़ी कार्रवाई कर “बड़े खिलाड़ियों” तक पहुँचता है या फिर कार्रवाई की यह गूंज सिर्फ प्रेस नोटों तक ही सीमित रह जाएगी

admin1

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