शिवपुरी जिले के कोलारस, बदरवास, लुकवासा, रन्नौद और खतोरा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत चौंकाने वाली है।
यहां दर्जनों पैथोलॉजी लैब बिना जरूरी मान्यता और योग्य विशेषज्ञों के संचालित हो रही हैं।
मरीजों को न सिर्फ गलत रिपोर्ट का खतरा है, बल्कि मनमानी फीस और कमीशन के खेल में उन्हें जबरन टेस्ट कराने को मजबूर किया जा रहा है।
*(ग्राउंड रिपोर्ट)*
जिले के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों—कोलारस, बदरवास, लुकवासा, रन्नौद और खतोरा—में पैथोलॉजी लैब्स की बाढ़ सी आ गई है।
आरोप है कि इन लैब्स में न तो MD Pathology विशेषज्ञ उपलब्ध हैं और न ही नियमों के मुताबिक रजिस्ट्रेशन।
कई जगह केवल DMLT या BMLT धारक ही रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ माना जाता है।
मुख्य आरोप (Strong Points)
बिना लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन लैब संचालन
गलत या संदिग्ध रिपोर्ट से मरीजों की जान को खतरा
टेस्ट के नाम पर मनमानी वसूली
हर मरीज को “अनिवार्य टेस्ट” के नाम पर भेजना
डॉक्टर और लैब के बीच कमीशन का खेल (रेफरल सिस्टम)
👉 सूत्रों के मुताबिक, कई मामलों में मरीज को छोटी बीमारी में भी महंगे टेस्ट लिखे जाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
गंभीर लापरवाही
बायोमेडिकल वेस्ट का निपटान भी नियमों के अनुसार नहीं हो रहा।
Pollution Control Board के नियमों की अनदेखी कर खून और मेडिकल कचरे को खुले में फेंका जा रहा है, जो संक्रमण फैलने का बड़ा खतरा है।
क्वालिटी पर सवाल
ज्यादातर लैब्स के पास NABL की मान्यता नहीं है, जिससे जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।
💰 मरीजों की मजबूरी
गरीब और ग्रामीण मरीज इलाज के नाम पर लुटने को मजबूर हैं।
एक ही टेस्ट के अलग-अलग दाम वसूले जा रहे हैं और रेट लिस्ट तक प्रदर्शित नहीं की जाती।
प्रशासन पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?
जबकि जिले में पहले भी इस तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं।
प्रशासन के लिए सीधा मैसेज
हाल ही में नवागत जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा द्वारा विभिन्न विभागों पर सख्त कार्रवाई की गई है।
ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि स्वास्थ्य विभाग और अवैध पैथोलॉजी लैब्स पर भी जल्द सख्त कार्रवाई होगी, ताकि मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़ रोका जा सके।
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