
शिवपुरी में बोर्ड परीक्षा बनाम शादी-सीजन का डीजे: किसकी चलेगी, कानून या फोन?
11 फरवरी से शिवपुरी जिले में कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं। संयोग देखिए कि ठीक इसी समय शादियों का पीक सीजन भी पूरे जोर पर है। हजारों छात्र जहां किताबों में डूबे हैं, वहीं रात होते ही गांव-गली और शहर की कॉलोनियां डीजे की गूंज से थर्रा उठती हैं। सवाल सीधा है—क्या जिला प्रशासन बच्चों के भविष्य की रक्षा कर पाएगा या नेताओं के फोन पर बारात नाचेगी?
हर साल वही कहानी दोहराई जाती है। प्रशासन आदेश निकालता है—“रात 10 बजे के बाद डीजे प्रतिबंधित।” कागजों में कानून सख्त होता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शादी-सीजन आते ही नियम बारात के आगे बौने साबित हो जाते हैं। जैसे ही किसी रसूखदार की शादी होती है, डीजे की आवाज बढ़ती है और पुलिस की कार्रवाई घट जाती है।
शादी का जश्न बनाम बच्चों का भविष्य
शादी जीवन का अहम मौका है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन क्या एक रात का जश्न, किसी छात्र के पूरे साल की मेहनत से बड़ा हो सकता है? सुबह परीक्षा देने जाने वाले बच्चे जब रात भर शोर में जागते रहते हैं, तो इसका खामियाजा वे परिणामों में भुगतते हैं। तब न प्रशासन सामने आता है, न नेता—दोष सिर्फ बच्चों का बताया जाता है।
कानून सबके लिए या चुनिंदा लोगों के लिए?
शिकायत करने पर आम जवाब मिलता है—“ऊपर से फोन है।” यही एक लाइन पूरे सिस्टम की पोल खोल देती है। अगर परीक्षा के दौरान भी कानून सिर्फ आम नागरिक पर लागू होगा और रसूखदारों को छूट मिलेगी, तो फिर नियम बनाने का मतलब क्या रह जाता है?
अब असली परीक्षा प्रशासन की
शादी-सीजन और बोर्ड परीक्षा का टकराव इस बार प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा है।
क्या परीक्षा अवधि में रात 10 बजे के बाद डीजे पर सख्ती होगी?
क्या बिना नाम-ओहदे देखे कार्रवाई होगी?
या फिर हर साल की तरह बारात नाचेगी और बच्चे सिस्टम को कोसेंगे?
मौन भी अपराध है
अगर इस बार भी शादी-सीजन की आड़ में डीजे का शोर नहीं रुका, तो यह सिर्फ नियमों की अवहेलना नहीं होगी, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य से खुला खिलवाड़ होगा।
अब फैसला शिवपुरी प्रशासन को करना है—
बोर्ड परीक्षा और बच्चों का भविष्य, या शादी-सीजन का डीजे?
