
जब सिस्टम चुप हो जाता है, तब जनता विधायक के आंगन में अपनी पीड़ा सुनाती है
जनता की पीड़ा इतनी गहरी है कि उसे सिस्टम नहीं, इंसान सुन रहा है
कोलारस विधायक महेंद्र सिंह यादव द्वारा अपने गृह निवास खतोरा में नियमित जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस जनसुनवाई में कोलारस विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ शिवपुरी जिले के अन्य क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में पीड़ित फरियादी पहुंचे।
हरे-भरे परिसर में लगी कुर्सियों पर बैठे लोग केवल अपनी समस्याएं नहीं, बल्कि वर्षों से जमा हुआ आक्रोश, थकान और इंतजार भी साथ लेकर आए थे। किसी के हाथ में आवेदन था, तो किसी की आंखों में सवाल—क्या इस बार बात सुनी जाएगी?
जनसुनवाई के दौरान विधायक महेंद्र सिंह यादव ने फरियादियों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और कई मामलों में मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को फोन कर त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। बिजली, पानी, सड़क, राजस्व, पेंशन, आवास और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़े मामलों ने यह साफ कर दिया कि समस्याएं नई नहीं हैं, बस अनसुनी हैं।
विधायक के फोन पर निर्देश मिलते ही फरियादियों के चेहरों पर उम्मीद की हल्की मुस्कान दिखी, लेकिन जनसुनवाई का यह दृश्य एक मौन प्रश्न भी छोड़ गया—
जब जनता को अपनी बात रखने के लिए विधायक के घर आना पड़े, तो फिर सरकारी दफ्तरों की जिम्मेदारी कहां खो जाती है?
खामोश बैठे बुजुर्ग, जमीन से जुड़े किसान और बार-बार चक्कर काट चुके आम लोग इस सच्चाई की गवाही दे रहे थे कि जनसुनवाई केवल समाधान का मंच नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना भी है, जहां आम आदमी की सुनवाई अंतिम विकल्प बन जाती है।
अब जनता की नजर इस पर टिकी है कि फोन पर दिए गए निर्देश फाइलों में दबते हैं या जमीन पर उतरते हैं, क्योंकि
लोकतंत्र में भरोसा आश्वासन से नहीं, परिणाम से बनता है।


